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नीतीश कुमार सीएम पद पर सितम्बर 2026 तक बने रह सकते हैं
- Reporter 12
- 29 Mar, 2026
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार नीतीश कुमार 6 महीने तक किसी सदन के सदस्य नहीं रहते हुए भी बिहार के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। इस्तीफा और राज्यसभा चुनाव की पूरी जानकारी।
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं और उनका सीएम पद पर बने रहना अगले छह महीनों तक संभव है। यह सुगम स्थिति संविधान के अनुच्छेद 164(4) के कारण है, जो किसी व्यक्ति को बिना विधानसभा या विधानमंडल के सदस्य बने भी मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की अनुमति देता है, लेकिन छह महीने के भीतर उन्हें किसी सदन की सदस्यता लेनी अनिवार्य होती है।
नीतीश कुमार 16 मार्च 2026 को राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं। इसके अनुसार उन्हें विधान परिषद की सदस्यता से 30 मार्च तक इस्तीफा देना होगा। इसके बावजूद सीएम पद पर बने रहने के लिए अनुच्छेद 164(4) उन्हें अनुमति देता है। इस कानूनी प्रावधान के तहत, वह सितम्बर 2026 तक मुख्यमंत्री पद की कुर्सी सुरक्षित रख सकते हैं।
सीएम पद से इस्तीफे का मामला टला
राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही है। हालांकि 30 मार्च को एमएलसी पद से उनका इस्तीफा अनिवार्य है, लेकिन संविधान की छह महीने की छूट उन्हें आराम से सीएम पद पर बने रहने की सुविधा देती है। इसे देखते हुए बिहार में कई नेताओं को अगले कुछ महीनों तक मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार की स्थिति पर नजर रखनी होगी।
नीतीश कुमार अपने एमएलसी पद से इस्तीफा देंगे, जिसके बाद वे छह महीने तक बिना किसी सदन के सदस्य बने ही सीएम रह सकते हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी पुष्टि की है कि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार कोई व्यक्ति किसी सदन का सदस्य नहीं होते हुए भी छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है।
अनुच्छेद 164(4) का महत्व
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत यह नियम लागू होता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सदन का सदस्य नहीं है, तब भी वह मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है। लेकिन छह महीने के भीतर उसे विधानसभा या विधानमंडल की सदस्यता लेनी होती है। नीतीश कुमार की स्थिति इस प्रावधान में पूरी तरह फिट बैठती है।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले, बीके कौर बनाम तमिलनाडु राज्य, में यह स्पष्ट किया गया था कि अनुच्छेद 164(4) का 6 महीने वाला नियम उन लोगों पर लागू होता है जो सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन सदस्य बनने के लिए योग्य (eligible) हैं। यदि कोई चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है, तो वह मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं बन सकता। नीतीश कुमार के मामले में ऐसी कोई अड़चन नहीं है।
नीतीश कुमार और नितिन नवीन की स्थिति
राज्यसभा चुनाव में नीतीश कुमार के साथ नितिन नवीन भी चुनाव जीत चुके हैं। दोनों को विधान परिषद की सदस्यता से 30 मार्च तक इस्तीफा देना होगा। इस दौरान नीतीश कुमार को सीएम पद पर बने रहने का अधिकार अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलेगा। इस कारण राजनीतिक समीकरणों में अगले छह महीने तक कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
नीतीश कुमार और जदयू के लिए यह एक राजनीतिक राहत की स्थिति है। विपक्षी दल और अन्य राज्यस्तरीय नेताओं के लिए भी सीएम पद पर नीतीश कुमार की स्थिति निश्चित रूप से अगले कुछ महीनों तक महत्वपूर्ण होगी।
राजनीतिक स्थिरता और कानून का संतुलन
संविधान का यह प्रावधान राज्य की राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए बनाया गया है। अगर किसी मुख्यमंत्री को अस्थायी रूप से सदन का सदस्य नहीं बनाया जा सके, तब भी सरकार के संचालन में बाधा न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 164(4) में छह महीने की छूट दी गई है।
नीतीश कुमार के लिए यह स्थिति लाभकारी है, क्योंकि वह अपने राज्य और पार्टी के लिए कई रणनीतिक फैसले ले सकते हैं। 6 महीने का समय उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक योजना बनाने में भी सहूलियत देता है।
पूर्व उदाहरण: जे. जयललिता का मामला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को तमिलनाडु में मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था जबकि वे उस समय विधानसभा की सदस्य नहीं थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 164(4) केवल उन लोगों पर लागू होता है जो सदस्य बनने के योग्य हैं। नीतीश कुमार की स्थिति भी पूरी तरह वैध है।
नीतीश कुमार की आगामी रणनीति
नीतीश कुमार सितम्बर 2026 तक सीएम बने रहेंगे। इस दौरान उन्हें अपने नेतृत्व और पार्टी की रणनीति को मजबूत करना होगा। राज्य में विकास, प्रशासन और चुनावी तैयारियों में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।
नीतीश कुमार की सीएम कुर्सी सुरक्षित होने से जदयू को राजनीतिक स्थिरता मिलेगी। इसके साथ ही उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
निष्कर्ष
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के प्रावधान नीतीश कुमार के लिए एक राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं। 16 मार्च को राज्यसभा जीतने के बाद भी वह सितम्बर 2026 तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। यह छूट उन्हें राजनीतिक योजना बनाने, पार्टी और राज्य प्रशासन को स्थिर रखने का समय देती है।
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